सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Blackhole की खोज में रहा Robert Oppenhiemer का बहुत बड़ा योगदान, लेकिन फिर भी नही मिल पाया था नोबल पुरस्कार

Short Series: Visit Link below 

ब्लैकहोल की खोज में प्रसिद्ध वैज्ञानिक ओपेनहाइमर का बहुत बड़ा योगदान रहा है , जैसा के सभी जानते हैं की उनको परमाणु बॉम्ब के जनक के रूप में भी जाना जाता है, विज्ञान के फील्ड में उनके इतने अहम योगदान के बावजूद भी उनको कभी नोबल पुरस्कार नही मिल पाया

ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो लिंक पर क्लीक करें

ब्लैकहोल की खोज में scientist openhiemer ka योगदान  


Openhiemer, परमाणु थ्योरी का जनक


Openhiemer, परमाणु थ्योरी का जनक

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पृथ्वी के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य: पृथ्वी पर तत्वों की प्रचुरता- Part -2

पृथ्वी पर तत्वों की प्रचुरता जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी कई बहुमूल्य संसाधनों से समृद्ध और प्रचुर है,  संभवतः पृथ्वी के विभिन्न संसाधनों, जीवन रूपों और प्राकृतिक आश्चर्यों से भरपूर होने की अवधारणा  गलत नहीं  है।  यहां कुछ पहलू दिए गए हैं जहां पृथ्वी को  समृद्ध और  प्रचुर माना जाता है जैव विविधता  पृथ्वी जैव विविधता में अविश्वसनीय रूप से समृद्ध है, जिसमें पौधों, जानवरों, कवक और सूक्ष्मजीवों की अनुमानित 8.7 मिलियन प्रजातियाँ हैं। महासागरों की गहराई से लेकर सबसे ऊंचे पहाड़ों तक, पर्यावरण की एक विस्तृत श्रृंखला में जीवन मौजूद है। पानी  प्रचुर मात्रा में पानी के कारण पृथ्वी को अक्सर "नीला ग्रह" कहा जाता है। महासागर, नदियाँ, झीलें और भूमिगत जलभृत जीवन और कृषि, उद्योग और परिवहन जैसी मानवीय गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में उपस्थित है। खनिज और संसाधन पृथ्वी विभिन्न खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, प्राकृतिक गैस), अयस्कों (लोहा, तांबा, एल्यूमीनियम), कीमती धातुओं (सोना, चांदी) और मूल्यवान रत्नों में  भ...

डिजिटल शिक्षा लोकप्रियता की तरफ कुछ सरकारी प्रयास हरियाणा सरकार 5 मई से कक्षा 10, 12 के छात्रों को 5 लाख से अधिक मुफ्त टैबलेट वितरित करेगी

  राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को 'ई-लर्निंग-एडवांस डिजिटल हरियाणा इनिशिएटिव ऑफ गवर्नमेंट विद एडेप्टिव मॉड्यूल्स' नाम दिया गया है। टैबलेट वितरण समारोह 5 मई को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के टैगोर सभागार में होगा। हरियाणा सरकार 5 मई से कक्षा 10-12 के छात्रों को मुफ्त टैबलेट वितरित करेगी, एक आधिकारिक बयान में सोमवार को कहा गया। उपकरणों में व्यक्तिगत और अनुकूली शिक्षण सॉफ्टवेयर के साथ प्रीलोडेड सामग्री होगी, और 5 लाख छात्रों को मुफ्त इंटरनेट डेटा भी प्रदान किया जाएगा। बयान में कहा गया है, "मुख्यमंत्री, हरियाणा के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' अभियान को आगे बढ़ाते हुए, सरकार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 5 लाख छात्रों को टैबलेट और मुफ्त डेटा प्रदान करने जा रही है।" “रोहतक शहर के सरकारी स्कूलों के छात्रों को टैबलेट दिए जाएंगे। प्रदेश भर के 119 प्रखंडों में इस दिन टैबलेट वितरण समारोह भी शुरू हो जाएगा. अन्य जिलों में, मंत्री, सांसद, विधायक, अन्य अतिथि, उपायुक्त और जिला प्रशासन के साथ उसी दिन टैबलेट वितरित...

घड़ी का इस्तेमाल हम रोज़ करते हैं, आइए जानते हैं घड़ी का आविष्कार किसने, कब और किस देश में किया?

घड़ी का आविष्कार सूरज की छाया का उपयोग कर समय बताने वाली घड़ियाँ शायद हमने भारत में लंबे समय से देखी हैं, लगभग सवा दो हज़ार साल पहले प्राचीन यूनान यानी ग्रीस में पानी से चलने वाली अलार्म घड़ियाँ हुआ करती थीं जिममें पानी के गिरते स्तर के साथ तय समय बाद घंटी बज जाती थी । लेकिन आधुनिक घड़ी के आविष्कार का मामला कुछ पेचीदा है, घड़ी की मिनट वाली सुई का आविष्कार,  अपने एक खगोलशास्त्री मित्र के लिए  वर्ष 1577 में स्विट्ज़रलैंड के जॉस बर्गी ने  किया  उनसे पहले जर्मनी के न्यूरमबर्ग शहर में पीटर  हेनलेन  ने ऐसी घड़ी बना ली थी जिसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया सके ।  लेकिन जिस तरह हम आज हाथ में घड़ी पहनते हैं वैसी पहली घड़ी पहनने वाले आदमी थे जाने माने फ़्राँसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज़ पास्कल ।  ये वही ब्लेज़ पास्कल हैं जिन्हें कैलकुलेटर का आविष्कारक भी माना जाता है ।  लगभग 1650 के आसपास लोग घड़ी जेब में रखकर घूमते थे, ब्लेज़ पास्कल ने एक रस्सी से इस घड़ी को हथेली में बाँध लिया ताकि वो काम करते समय घड़ी देख सकें, उनके कई साथियों ने उनका मज़ाक भी उड़...