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Swami Vivekananda Quotes in Hindi : स्वामी विवेकानन्द जी के अनुसार चरित्र गठन की व्यायामशाला है ये संसार

महान राष्ट्र भारत

भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जिसने सदैव मानवता का उद्धार किया है। भारत में कई ऐसे महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने आपने जीवन को लोककल्याण के लिए समर्पित किया और हमेशा विश्व का मार्गदर्शन किया। इसी कारण से विश्व ने भारत को सदैव विश्व गुरु के रूप में स्वीकार किया और अपने जीवन का उद्धार किया। भारत में हर सदी में ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने अपनी निस्वार्थ भावना का परिचय देकर सारे संसार का कल्याण किया। ऐसे ही महापुरुषों में से एक “स्वामी विवेकांनद” भी थे, जिन्होंने 19 वीं और 20 वीं शताब्दी में एक प्रसिद्ध समाज सुधारक के रूप में विश्व का नेतृत्व तो किया ही, साथ ही उन्होंने भारत में हिंदू धर्म का पुनरुत्थान भी किया। Swami Vivekananda Quotes in Hindi के माध्यम से आप स्वामी विवेकानंद के उन अनमोल विचारों को पढ़ पाएंगे, जो आपको जीवन भर प्रेरित करेंगे।

Swami Vivekananda Ji Quotes

स्वामी विवेकानन्द जी के अनुसार

संसार न तो अच्छा है, ना ही बुरा हर मनुष्य अपने लिए अपना-अपना संसार बना लेता है हमारी मानसिक अवस्था के अनुसार ही हमें ये संसार भला या बुरा प्रतीत होता है। जैसे अग्नि स्वयं में न अच्छी है न बुरी जब यह हमें गर्म रखती है तो हम कहते हैं कि यह कितनी अच्छी है, लेकिन फिर जब कभी हमारी उंगली जल जाती है तो हम उसे दोष देते हैं । वही हाल इस संसार का है 

संसार स्वयं पूर्ण है पूर्ण का अर्थ है कि वह अपनी सभी गतिविधियों को पूरा करने में सक्षम है। हमें यह समझना होगा कि यह संसार हमारे बिना भी मजे से चल जाएगा, रुकने वाला नहीं है

हमें उसकी सहायता करने के लिए अधिक माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है, लेकिन फिर भी हमेशा हमें प्रोपकार करते रहना चाहिए

अगर हम यह मानें कि दूसरों की मदद करना एक आशीर्वाद और सौभाग्य है, तो प्रोपकार करने की इच्छा एक सर्वोत्तम प्रेरणा शक्ति है 

एक दाता के ऊंचे आसन पर खेड़े होकर, दो पैसे हाथ में लेकर ये मत कहो के "हे भिखारी" लो मैं ये तुम्हें देता हूं, बल्कि आपको यह मानकर कृतज्ञ होना ​​होगा कि इस संसार में यह आपके लिए दयालु होने और सांसारिक गतिविधियों का एक अच्छा हिस्सा बनने का अवसर प्राप्त हुआ  है। धन्य पाने वाला नहीं, देने वाला होता है

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां लोग आमतौर पर हर दूसरे मूल्य पर अपने व्यक्तिगत लाभ पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसलिए, ऐसी दुनिया को स्वामी विवेकानंद के इस शिक्षण को अपने भीतर समाहित करने की आवश्यकता है। उनका मानना ​​था कि यदि आपके पास संसाधन हैं, तो आपको उन संसाधनों का योगदान करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है जो आपके आसपास दूसरों की अधिक भलाई के लिए हैं। यदि आप अपने आप को दयालुता के निस्वार्थ कार्यों में शामिल करते हैं, तो आप खुशी की भावना तक पहुंचेंगे जो कि आनंददायक होगा।

भलाई के सभी कार्य हमें पवित्र और पूर्ण बनाने में सहायता करते हैं । ये संसार न तो तुम्हारी भलाई का भूखा है और न ही मेरी। लेकिन फिर भी हमें निरंतर भलाई और अच्छे कार्य करते रहना चाहिए क्योंकि इसमें हमारा ही भला होता है और हमें संसार में पूर्ण बनने की और बढ़ने का मौका मिलता है। केवल  यह एक साधन है

सुविचार

कितनी बार ऐसा होता है कि हम असुविधाओं के चेहरे पर हार मान लेते हैं और अपने लक्ष्य को छोड़ देते हैं, लेकिन स्वामी विवेकानंद मानवता की महानता में विश्वास करते थे। उनका मानना था कि मनुष्य किसी भी बाधा को दूर करने की क्षमता रखता है, यदि वह पर्याप्त रूप से लगातार अपने प्रयसों पर कार्यरत हो। यह स्वामी विवेकानंद का एक और स्वर्णिम उपदेश है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि आप लगातार कुछ करने के लिए काम कर रहे हैं, जिससे आपको सफलता मिलती है। इसलिए, यदि आप बार-बार असफल होते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यदि आप प्रयास करते रहेंगे, तो आप एक दिन या दूसरे दिन अपने लक्ष्य तक पहुंच ही जाएंगे।

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